Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इदमर्घ्यं च पाद्यं च भूयो दत्तवति स्वयम् ।
भुशुण्डविहगे तस्मिन्निदं रामाहमुक्तवान् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, दूसरी बार स्वयं उस भुशुण्ड
पक्षी के द्वारा अर्घ्य, पाद्य देने पर मैने यह कहा