Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
यदा पपात कल्पान्ते व्यवहारो जगत्स्थितौ ।
कृतघ्न इव सन्मित्रं तदा नीडं त्यजाम्यहम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, जब सहस्र महायुगों के अन्त में जगत की अवस्था में व्यवहार गिर जाता
है, तब सन्मित्र का परित्याग कर देनेवाले कृतघ्न की नाई मैं इस घोंसले का परित्याग कर देता
हूँ