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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

प्रवृद्धासुरसंग्रामे क्षीयमाणन्तरामिह । पलायमानामभितः संस्मरामि धरामिमाम् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ बल, ऐश्वर्य आदि से परिपुष्ट असुरो का संग्राम होने पर जव इस पृथ्वी का भीतरी भाग क्षीण हो गया था, तब यह पलायनमान जनों से व्याप्त हो गई थी - इसका भी मुझे अच्छी तरह से स्मरण हे