Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
चतुर्युगानि चाक्रान्तामसुरैर्मत्तकाशिभिः ।
दैत्यान्तःपुरतां प्राप्तां संस्मरामि धरामिमाम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
चार युगो तक मद-मत्त एेश्वर्यशाली असुरो के द्वारा आक्रान्त हुई यह पृथ्वी उनके (असुरो
के) अन्तःपुर रूपता को प्राप्त हो गई थी-इसका भी स्मरण करता हूँ