Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
चतुर्युगार्धमपरं नीरन्ध्रां वनपादपैः ।
अदृष्टेतरनिर्माणां संस्मरामि धरामिमाम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
दो युगो तक तो यह (पृथ्वी) जंगली वृक्षों से निबिड थी और इसमें उन्हे (वृक्षों
को) छोड़ दूसरे किसी का निर्माण ही नहीं हुआ था - इसे भी स्मरण करता हूँ