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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

भयादन्तर्हिताशेषवैमानिकनभश्चराम् । द्यां च निर्वृक्षनिःशेषां संस्मरामि तमोमयीम् ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

एक समय अन्तरिक्ष आदि लोकों मेँ भय के कारण समस्त विमानगामी देवता आदि तिरोहित हो गये थे ओर यह (पृथ्वी) सब वृक्षों से वर्जित होकर अन्धकार प्रचुर हो गई थी - इसका भी मुझे स्मरण है