Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
दशवर्षसहस्राणि मृतदैत्यास्थिपर्वतैः ।
आकीर्णां परितः पूर्णां संस्मरामि धरामिमाम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
दस हजार वर्षो तक तो यह मृत दैत्यों के अस्थिपर्वतों से
चारों ओर से व्याप्त एवं परिपूर्ण थी - इसका भी मैं भली-भाँति स्मरण करता हूँ