Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
असंख्यातान्मनून्ब्रह्मन्स्मरामि शतशो गतान् ।
सर्वान्संरम्भबहुलांश्चतुर्युगशतानि च ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे ब्रह्मन्, सेकडों असंख्य मनु बीत गये, ये सब प्रभाव
के आधिक्य से परिपूर्णं थे एवं सैकड़ों चतुर्युग भी बीत गये - इसका भी मुझे स्मरण हे