Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
एकरूपाखिलाचारसंनिवेशधरामरान् ।
समकालान्स्थिरस्थैर्यान्दशसर्गान्स्मराम्यहम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, मुझे ऐसे दस सर्गो का स्मरण है-जिनमें देवताओं के निखिल आचरण तथा अवयव-
गठन एकरूप थे, उनकी आयु समान थी एवं अपने नियत तत्-तत् अधिकारपदों में उनकी स्थिति
असुरो द्वारा चालित नहीं हुई थी