Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मन्दराकर्षणावेगपर्याकुलसुरासुरम् ।
स्मरामि द्वादशं चेदममृताम्भोधिमन्थनम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाराज, मन्दराचल के आकर्षण के लिए किये गये भारी प्रयत्न
के कारण व्याकुल हुए देवता एवं दानवो से युक्त यह अमृतार्थं समुद्र-मन्थन बारहवाँ हुआ-ऐसा मुझे
स्मरण है