Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सर्वौषधिरसोपेतां बलिग्राहस्तदा दिवः ।
वारत्रयहिरण्याक्षो नीतवान्वसुधामधः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, पहले स्वर्गस्थ समस्त देवताओं से कर लेनेवाला, हिरण्याक्ष तीन बार समस्त
औषधियों तथा रसों से परिपूर्ण इस पृथ्वी को पाताल में ले गया