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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

रेणुकात्मजतां गत्वा षष्ठवारमिमं हरिः । बहुसर्गान्तरेणापि चकार क्षत्रियक्षयम् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

रेणुका के उदर से जन्म लेकर भगवान नारायण ने, परशुराम-अवतार से शून्य अनेक सर्गो के व्यवधान से भी, यह छठी वार क्षत्रिय- विनाश किया