Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
पुलहोद्दालकाद्येषु क्रतुभृग्वङ्गिरस्सु च ।
सनत्कुमारभृङ्गीशस्कन्देभवदनादिषु ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
पुलह, उद्दालक आदि तथा क्रतु, भृगु,
अंगिरा आदि सिद्ध-ऋषि, सनत्कुमार आदि ब्रह्मर्षि एवं भृगीश, स्कन्द, गजवदन आदि शिवजी के
पार्षदों के विषय में तो स्मरण की गणना ही क्या ?