Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
गौरीसरस्वतीलक्ष्मीगायत्र्याद्यासु भूरिषु ।
मेरुमन्दरकैलासहिमवद्दर्दुरादिषु ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
गौरी, सरस्वती, लक्ष्मी, गायत्री आदि अनेक
उनकी शक्तियों तथा सुमेरु, मन्दर, कैलास, हिमालय, दर्दुर आदि पर्वतो के विषय में स्मरण की तो
गणना ही क्या ?