Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
हयग्रीवहिरण्याक्षकालनेमिबलादिषु ।
हिरण्यकशिपुक्राथबलिप्रह्रादकादिषु ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
हयग्रीव आदि दानवो; हिरण्याक्ष, कालनेमि, बल, हिरण्यकशिपु, क्राथ, बलि,
प्रह्लाद आदि दैत्यों के विषय में स्मरण की तो गणना ही क्या ?