Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
शिबिन्यङ्कुपृथूलाख्यवैन्यनाभागकेलिषु ।
नलमान्धातृसगरदिलीपनहुषादिषु ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
शिवि, न्यंकु, पृथु, उलाख्य, वैन्य,
नाभाग, केलि, नल, मान्धाता, सगर, दिलीप, नहुष आदि राजा ओं के विषय में स्मरण की तो गणना ही
क्या ?