Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एकार्थानि समग्राणि बहुपाठानि मेऽनघ ।
पुराणानि प्रवर्तन्ते प्रसृतानि युगंप्रति ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे पापशून्य, युग-युग में प्रत्येक द्वापर के अंत में निर्माताओं के भेद से अनेक पाठवाले,
एकार्थक तथा अत्यंत विस्तारयुक्त पुराण प्रवृत्त होते हैं इसका मुझे स्मरण है