Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
पुनस्तानेव तानेवमन्यानपि युगे युगे ।
वेदादिवित्प्ररचितानितिहासान्स्मराम्यहम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
मुने, युग-युग
में वेद आदि शास्त्रों के विद्वान व्यास, वाल्मीकि आदि महर्षियों द्वारा विरचित उन्हीं महाभारत, रामायण
आदि इतिहासो एवं दूसरे इतिहासो का भी मैं स्मरण करता हूँ