Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
व्यासाभिधेन जीवेन तेनैवान्येन वा कृतम् ।
एतत्तु सप्तमं वारं क्रियते विस्मृतिं गतम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी (पूर्वकल्प के) अथवा
दूसरे किसी ओर व्यासनामक जीव के द्वारा किये गये तथा कल्पान्त में विस्मृति को प्राप्त हुए उस
महाभारत की सातवीं बार रचना की जायेगी