Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
आख्यानकानि शास्त्राणि निवृत्तानि युगंप्रति ।
विचित्रसंनिवेशानि संस्मरामि मुनीश्वर ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिराज, युग-युग में प्रवृत्त हुए अनेक आख्यानं
एवं शास्त्रों का, जो चित्र-विचित्र घटना-सन्निवेशों से परिपूर्ण थे, में स्मरण करता हूँ