Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तान्येव तादृक्कर्माणि तथान्याचरणानि च ।
तत्कर्माणि तथान्यानि भूतानीह स्मराम्यहम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
मनु आदि अधिकारी पुरुषों के आकारों ओर चरित्रों की समता भी औत्सर्गिक ही है, ऐसा कहते हैं ।
महाराज, किसी एक कल्प में जो प्राणी जिस रुप के जो आचार-व्यवहार करते थे, ठीक उसी
रूप के वे ही प्राणी तत्परवर्ती कल्प में भी आचार-व्यवहार करते देखे गये तथा दूसरे प्राणी उन्हीं
के आचार-व्यवहार करते देखे गये-इसका मुझे वर्तमान में स्मरण है