Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
चूतवृक्षे च शाखायां प्राप्य नीडं करोम्यहम् ।
अनाद्यन्तेषु यातेषु युगेषु मुनिनायक ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिनायक,
असंख्य युगो के बीत जानेपर भी इस समय प्राक्तन अवयवों के सन्निवेश (रचना) से ही यह कल्पवृक्ष
उत्पन्न हुआ है