Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
विचित्रसंस्थानविशेषदेशान्विचित्रकार्याकुलभूतकोशान् ।
विचित्रविन्यासविलासवेषान्स्मराम्यहं ब्रह्मदिनेष्वशेषाम् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
कथित समस्त अर्थो का संक्षेप से उपसंहार करते हैं।
महाराज, ब्रह्माजी के दिवसरूपी कल्पो मे हुए चित्र-विचित्र विशेष संस्थानों वाले देशों से युक्त;
चित्र-विचित्र अनेक कार्यो में व्याकुल प्राणियों के कोशभूत तथा चित्र-विचित्र विन्यास,विलास एवं वेषों
से युक्त समस्त सर्गो का मेँ स्मरण करता हू