Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अथासौ वायसश्रेष्ठो जिज्ञासार्थमिदं मया ।
भूयः पृष्टो महाबाहो कल्पवृक्षलताग्रके ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे महाबाहो श्रीरामजी, तदनन्तर कल्पलता के अग्रभाग मेँ आसीन
उस वायसराज भुशुण्ड को मेने जिज्ञासा के लिए यह आगे की बात फिर पूछी
सर्ग सन्दर्भ
बाईसवाँ सर्ग समाप्त तेईसवाँ सर्ग जिन दोषों का परित्याग कर देने पर मनुष्य को मृत्यु बाधा नहीं पहुँचाती, उन दोषों का तथा मन को जिसमें लगाना चाहिए - उसका वर्णन ।