Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
नास्तमेति न चोदेति न संस्मृतिर्न विस्मृतिः ।
न सुप्तं न च जाग्रत्स्याच्चित्तं यस्य समाहितम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस महापुरुष का चित्त समाहित है, उसका चित्त न अस्त होता हे,
न उदित होता हे, न उसमें स्मृति होती है, न विस्मृति होती है, न सुषुप्ति होती है, न जागृति ही होती
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