Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अन्धीकृतहृदाकाशाः कामकोपविकारजाः ।
चिन्ता न परिहिंसन्ति चित्तं यस्य समाहितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस महात्मा का चित्त समाहित है, उसकी काम क्रोध आदि विकारों से उत्पन्न तथा हृदयाकाश
को आवृत कर देनेवाली चिन्ता किसी तरह हिंसा नहीं करती