Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
न ददाति न चादत्ते न जहाति न याचते ।
कुर्वदेव च कार्याणि चित्तं यस्य समाहितम् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका चित्त समाहित है,
शास्त्रानुसारी व्यवहारों को चलाता हुआ भी वह परमार्थतः न कुछ देता है, न ग्रहण करता है, न कुछ
त्यागता है और न कुछ माँगता ही है