Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
यदनन्तं मनःपथ्यं तथ्यमाद्यन्तमध्यगम् ।
समस्तसाधुभिर्जुष्टं तत्परं कारयेन्मनः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो अविनाशी है, मन के लिए सदा
हितकर है, अबाधितस्वरूप है, आदि मध्य एंव अन्त-इन सभी अवस्थाओं में अनुस्यूत है तथा जिसकी
समस्त सन्तलोग प्रीतिपूर्वकं उपासना करते हैं, उस आत्मलाभरूप तत्त्व में मन को स्थिर करना
चाहिए