Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
आदौ मध्ये तथान्ते च चिराय परमोचितम् ।
यच्चारु मधुरं पथ्यं तत्परं कारयेन्मनः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
अनादिकाल से सबसे बढ़-चढ़कर जिसका औचित्य सिद्ध हो चुका है, तथा जो आरम्भ
में सुन्दर, मध्य में (अर्ध-परिपाककाल में) मधुर और अन्त में समस्त दुःखों का निर्वतक है, उस
आत्म-लाभरूप ज्ञानतत्त्व में मन को स्थिर करना चाहिए