Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
यददृष्टमशुद्धेन चित्तवैधुर्यदायिना ।
अनेकत्वपिशाचेन तत्परं कारयेन्मनः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, चित्त को पुरुषार्थशून्य बनानेवाले, अपवित्र, द्वैत-दर्शनरूप पिशाचके
द्वारा जो तत्त्व कभी भी आक्रान्त नहीं होता, उसी एक आत्म-लाभरूप तत्त्व में मन को स्थिर करना
चाहिए