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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

आधिव्याधिविलोलासु दुःखौघवलितासु च । क्रियासुनित्यतुच्छासु न किंचित्सुस्थिरं शुभम् ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

आधि (मानसिक व्यथा) एवं व्याधि से अत्यन्त चपल तथा दुख:समूह से परिवेष्टित सर्वदा तुच्छ क्रियाजन्य फलों में कुछ भी स्थिर ओर कल्याणकारक नहीं है