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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

रागद्वेषविषापूरः स्वमनोबिलमन्दिरः । लोभव्यालो न भुङ्क्ते यं मृत्युस्तं न जिघांसति ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

राग -द्रेषरूपी विष से परिपूर्ण अपने मनरूपी बिल में रहनेवाला लोभरूपी सर्प जिसको दंश नहीं करता, उसे मृत्यु मारने की इच्छा नहीं करती