Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सर्वसंशयविच्छेदिन्नत्यन्तचिरजीवित ।
यथार्थम ब्रूहि मे साधो प्राणचिन्ता किमुच्यते ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त सन्देहो को काटनेवाले हे अत्यन्त दीर्घजीवी साधो, तुम मुझसे ठीक-ठीक कहो कि प्राण-
चिन्ता किसे कहते हैं