Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अन्तः पश्यसि सत्कर्णशष्कुलीचन्द्रशालिकम् ।
शिरोरुहाच्छादनवद्विपुलाक्षिगवाक्षकम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, जिसका में वर्णन करने
जा रहा हूँ, उस देहरूपी घर का आप अपने भीतर साक्षीरूप से प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हे । उसमें सुन्दर
दो कर्णविवररूपी दो चन्द्रशाला यानी शिरोगृह (सवके ऊपर स्थित छोटे बँगले) है, केश-समूह
उसका आच्छादन (खपरा) है और दो चक्षु ही उसमें बड़े झरोखे हैं