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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

वृद्धिं नीतः स नाडीषु कृत्वा स्थानमनेकधा । ऊर्ध्वाधोवर्तमानासु देहेऽस्मिन्प्रसरत्यथ ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर उस प्रकार वृद्धि को प्राप्त हुआ वह वायु हृदय, गुदा, नाभि, कण्ठ एवं समस्त अंगों को अनेक तरह से अपना आश्रय बनाकर प्राण आदि पाँच संज्ञावाला होता हुआ ऊपर-नीचे विद्यमान बहत्तर हजार नाडियों की प्रतिशाखा एक सौ एक नाड़ियों में प्रवेश कर इस शरीर में संचरण करता है