Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
कलेवरमहायन्त्रवाहयोः श्रमहीनयोः ।
हृदाकाशार्कशशिनोस्त्वग्नीषोमस्वरूपयोः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिराज, प्राण ओर
अपान दोनों शरीररूपी महायन्त्र के दो घोड़े हे, श्रम से (मृत्यु से) रहित हैं, हृदयाकाश के सूर्य एवं
चन्द्रमा हैँ ओर उनका स्वरूप अग्नि एवं सोम के सदृश है