Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
ज्योत्स्नयेवान्धकाराणामलमन्तः प्रजायते ।
सा स्वात्मचिन्ता भगवन्सर्वसंकल्पवर्जिता ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, चन्द्रिका के सदृश तथोक्त आत्मचिन्ता से अज्ञानरूपी अन्धकार
का, उसके कार्यो के साथ भली प्रकार विनाश हो जाता हे । वह सुन्दर आत्मचिन्ता समस्त संकल्पो से
रहित है