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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verses 7–8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verses 7–8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 7,8

संस्कृत श्लोक

किंचित्साम्यमुपायाता विज्ञानशशिशीतलाः । आत्मचिन्तासमानानां विविधानां मुनीश्वर ॥ ७ ॥ आत्मचिन्तावयस्यानां मध्यादेकतमा मया । सर्वदुःखक्षयकरी सर्वसौभाग्यवर्धिनी ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुनिराज, आत्मचिन्ता से मिलती-जुलती विविध आत्मचिन्ता की सखियों के बीच में से एक प्राणचिन्तानामक सखी का, जो समस्त दुःखों का विनाश करनेवाली तथा समस्त सौभाग्यो को बढानेवाली हे, मैंने आश्रय लिया है, वही यहाँ मेरे जीवन की हेतु भी है