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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

पदमासादयन्त्येतत्कथं सामान्यबुद्धयः । आत्मचिन्ताविलासिन्यास्तस्याः सख्यो महामुने ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

तव वह आत्म-दुष्ि तुम्हें कैसे सुलभ हुई, इस प्रश्नपर उसकी सखी के आश्रय से प्राप्त हुई, इस असिप्राय से प्राणचिन्ता का वर्णन करने के लिए पक्षिराज भ्रुशुण्ड भूमिका बधते है। महामुने, उस आत्मचिन्तारूपी (साक्षात्कार तक होनेवाले आत्मविचाररूपी) विलासिनी की, कुछ समानता रखनेवाली तथा विज्ञानरूपी चन्द्रमा से शीतल हुई अनेक सखियाँ हैं