Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
स्वभावाः सर्वकालस्थाः सम्यग्यत्नविवर्जिताः ।
ये प्रोक्ताः स्फारमतिभिस्ताञ्छृणु त्वं महामते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
महामुने, जाग्रत आदि सभी
समयो में स्थित रहनेवाले तथा किसी प्रकार के यत्न के बिना स्वतः होनेवाले जिन रेचक आदि का
विशाल बुद्धि विद्वानों ने कथन किया है, उन्हें आप सुनिये