Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
रेचकः कुम्भकश्चैव पूरकश्च त्रिधा स्थितः ।
अपानस्योदयस्थाने द्वादशान्तादधो बहिः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
बाहर भी रेचक आदि प्राणायामो का दिग्दर्शन कराने के लिए उपक्रम करते है।
नासिका के अग्रभाग से लेकर बाहर के बारह अंगुलपर्यन्त नीचे अपानवायु की उत्पत्ति स्थल में
रेचक, कुम्भक ओर पूरक यों तीन प्रकार का प्राणायाम होता हे