Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अपानस्य बहिष्ठं तमपरं पूरकं विदुः ।
बाह्यानाभ्थन्तरांश्चैतान्कुम्भकादीननारतम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, प्राण और अपानवायु के स्वभावभूत ये जो बाह्य और आभ्यन्तर कुम्भक आदि
प्राणायाम हैं, उनका निरन्तर भली प्रकार ज्ञान रखनेवाला (उपासना करनेवाला) पुरुष पुनः इस संसार
में उत्पन्न नहीं होता