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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

दिनैः कतिपयैरेव पदमाप्नोति केवलम् । एतदभ्यसतः पुंसो बाह्ये विषयवृत्तिषु ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार प्राणायाम का अभ्यास कर रहे पुरुष का मन विषयाकार वृत्तियों के होने पर भी बाह्य विषयों में उस प्रकार प्रेम नहीं करता, जिस प्रकार ब्राह्मण कुत्ते के चमड़े की भाथी में स्थित खीर आदि में प्रेम नहीं करता