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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

द्वादशाङ्गुलपर्यन्ते प्राणोऽस्तं यात्ययं बहिः । अपानस्योदयो बाह्याद्द्वादशान्तान्महामुने ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

हे महामुने, बाह्य बारह अंगुल की चरम सीमा से अपान का उदय होता है और हृदय प्रदेश में संस्थित कमल में उसकी गति अस्त हो जाती है