Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
प्राणापानगतिं प्राप्य सुस्वस्थः सुखमेधते ।
प्राणस्याभ्युदयो ब्रह्मन्पद्मपत्राद्धृदि स्थितात् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे ब्रह्मन्, हृदय प्रदेश में स्थित
पद्मपत्र से प्राण का अभ्युदय होता है ओर बाहर बारह अंगुलपर्यन्त प्रदेश में इस प्राण का विनाश
हो जाता है