Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
संशान्तमलमोहेन स्वस्थेनान्तरिहोष्यते ।
सर्वारम्भान्सदा स्वच्छः कुर्वन्वापि बुधो जनः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त कर्मो का निरन्तर अनुष्ठान कर रहा स्वच्छ -चित्त विज्ञ पुरुष प्राण अपान
गति को प्राप्तकर, उत्तम स्वस्थ होकर सुख प्राप्त करता हे