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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

जाग्रतः स्वपतश्चैव प्राणायामोऽयमुत्तमः । प्रवर्तते यतस्तज्ज्ञ तत्तावच्छ्रेयसे शृणु ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

कल्याण के लिए उत्तम साधनभूत प्राणायाम अयत्नतः प्रवृत्त होता रहता है, अतः उसे आप सुनिए