Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
प्राणक्षयस्योपान्तस्थमपानक्षयकोटिगम् ।
अपानप्राणयोर्मध्यं चिदात्मानमुपास्महे ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो प्राणविलय
का और जो अपानविनाश का समीप एवं अन्त में रहकर प्रकाशक है तथा जो प्राण ओर अपान के
अन्दर रहता है, हम लोग उस चिदात्मा की उपासना करते हैं