Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
जलस्यान्तरिवास्वादमपानस्यान्तरस्थितम् ।
न सप्राणं न वाऽप्राणं चिदात्मानमुपास्महे ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार जल के अन्दर माधुर्य रहता है, उसी प्रकार अपान के अन्दर रहनेवाले
चिदात्मा की, जो सजीव और निर्जीव रूप नहीं है, हम लोग उपासना करते हैं