Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
प्राणापानरथारूढं प्राणापानमनाततम् ।
यच्छक्तिरूपं शक्तीनां तच्चित्तत्त्वमुपास्महे ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
के ऊपर आरूढ होकर परिच्छिन्न होता हुआ प्राण ओर अपान की शक्तिस्वरूप हो जाता है एवं
अन्यान्य चक्षु आदि करणों में स्थित शक्तियों का भी जो शक्तिस्वरूप है, उस चित्तत्त्व की हम
उपासना करते हैं